विशुनपुरा(गढ़वा)/राजू सिंह
प्रखंड के किसानों को बेशबरी से मानसून का इंतजार है. कर्जे के बोझ में दबे किसान अच्छी बरसात होने की आस लिए बैठे है. मगर किसानों का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. आधा जून माह बीत गया मगर अभी तक प्रखंड क्षेत्र में मानसून ने दस्तक नहीं दी है.
किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं. किसानो के खेत खाली पड़े हैं. आर्थिक रूप से टूट चुके किसानों को मानसूनी बरसात का बेशबरी से इंतजार है. ताकि वह खेती किसानी शुरू कर सके. किसानों को यह चिंता सता रही है. कि विगत वर्ष की तरह यदी इस वर्ष भी अल्पवर्षा होती है .तो किसानों को विभिन्न प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ेगा.
सुखाड़ के बाद भी यदि किसानों को इस वर्ष राहत नहीं मिलती है. तो खेती किसानी के प्रति वह निराश भी हो सकते हैं.स्थानीय किसानों को कहना है कि लम्बे इंतजार के बाद भी बर्षा के नहीं होने से खेतों में लम्बी दरार आ गई है.
अगर वर्षा नहीं हुई तो दरार के कारण खेत की उर्वरा शक्ति खत्म हो सकती है. जिससे हमारा समस्त जीवनयापन जुड़ा है.
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