रमना (गढ़वा)/ राहुल कुमार
मौसम की बेरुखी ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी है। आधा सावन गुजर गया लेकिन अभी भी हर तरफ सिर्फ सूखा नजर आता है। रमना प्रखंड वासियों द्वारा किये गए धान का बिहन सुखने की कगार पर है। वही तेलहन और दलहन की फसलें भी दम तोड़ रही है।
देवराज इंद्र की नाराजगी से किसान हताश व निराश हैं। बिचड़े को बचाने के लिए किसान बोरिंग के सहारे खेतों में पटवन में जुटे हैं, लेकिन यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है। जिला में धान का कटोरा कहे जाने वाले रमना प्रखंड के किसानों के चेहरे पर साफ मायूसी छलकने लगी है। प्रखंड में करीब 80 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं। परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा सहित अन्य कार्य के लिए खेती से होनेवाली आय पर ही यहां की बड़ी आबादी निर्भर है। ऐसे में पानी नहीं पड़ने से खेती के भविष्य की चिंता किसानों को सताने लगी है। सभी नदियां, तालाब,आहर -पोखर सूखे पड़े हैं। किसानों की मानें तो रोहिणी नक्षत्र में जो बिचड़े बोए गए थे। अब तक उनकी रोपनी हो जानी चाहिए थी लेकिन अभी धनरोपनी शुरू भी नहीं हो पाई है। पानी के अभाव में बिचड़े सूखने लगे हैं। ऐसे में लक्ष्य के अनुरूप खेतों में धान की रोपनी संभव नहीं दिख रही है। वही सुबह से शाम तक निकलने वाले तेज धुप से मक्का, अरहर और तेलहन के फसल भी प्रभावित होने लगे है।
-रमना प्रखंड मे वर्षापात के आकड़े है डरावने-
रमना प्रखंड मुख्यालय सहीत आसपास के ग्रामीण इलाकों मे वर्षापात के आकड़े डरावने है। जुन माह मे औसत बारिश 165 मीमी होना चाहिए जबकि इस बार सिर्फ 14.2 मीमी दर्ज किया गया है वही जुलाई माह मे 15 जुलाई तक सिर्फ 57 मीमी बारिश दर्ज किया गया है।
Advertisement







Users Today : 13
Total Users : 350633
Views Today : 29
Total views : 504395