धुरकी(गढ़वा)/बेलाल अंसारी
प्रखंड के सरकारी स्कूल में शिक्षण कार्य में उदासीनता साफ नजर आती है। ऐसा लगता है जैसे शिक्षण कार्य के नाम पर खानापूर्ति किया जा रहा है।
धुरकी स्थित एक मिडिल स्कूल की हालत देखकर तो यही लगता है। इस स्कूल के बोर्ड पर आज भी राज्यपाल का नाम रमेश बैस लिखा हुआ है। वही झारखंड के शिक्षा मंत्री के नाम के आगे लिखे जगरनाथ महतो तो मिटा दिया गया है लेकिन वर्तमान शिक्षा मंत्री का नाम खाली है। जबकि इसी बोर्ड में लिखे सामान्य जानकारी को बच्चे पढ़ते हैं।
यह गुणवतापूर्ण शिक्षा के नाम पर शिक्षक सहित स्कूल विजिट करने वाले शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों की घोर उदासीनता दर्शाता है। शिक्षक के साथ इसकी जिम्मेदारी सीआरपी की भी होनी चाहिए। सीआरपी पर विभाग ने नियमित रूप से स्कूल विजिट कर बच्चो को गुणवतापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने की जिम्मेवारी दी है। वही धुरकी प्रखंड में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी का पद हमेशा प्रभार में ही रहता है। जिसका खामियाजा बच्चे भुगतते हैं। सरकार प्राथमिक शिक्षा को लेकर काफी गंभीर है। सरकार का लक्ष्य शत प्रतिशत बच्चो को गुणवतापूर्ण प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। काफी पैसे खर्च कर शिक्षकों की ट्रेनिंग से लेकर स्कूल में हर सुविधा सरकार उपलब्ध कराती है। लेकिन इस तरह की लापरवाही सरकार के उद्देश्यों पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं।
“इस संबंध में बीइइओ प्रतिभा कुमारी ने बताया की यह शिक्षक की लापरवाही है। वर्तमान समय के मंत्री का नाम अपडेट करते रहना है”
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