1932 खतियान पर जनता को गुमराह कर रहे हैं अमित शाह
गढ़वा/हिंदुस्तान की आवाज़
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह पर हमला बोला है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता धीरज दुबे ने अमित शाह के बयान को गुमराह करने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि चाईबासा में अमित शाह ने 1932 के खतियान को झारखंड को बांटने वाली नीति बताकर जनता को गुमराह करने का काम किया है, जबकि तत्कालीन रघुवर सरकार ने अपने कार्यकाल में दोहरी नियोजन नीति लाकर झारखंड को 13 और 11 जिलों में बांटने का काम किया था। भाजपा की नीति शुरुआत से ही बांटने वाली रही है, धर्म और जाति के नाम पर लोगों को लड़ाने का काम करती है। वोट की राजनीति और चुनाव जीतने के लिए भाजपा किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहती है। झारखंड पहुंचे अमित शाह को झारखंड की विकास की चिंता नहीं है, बल्कि वह 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यहां पहुंचे थे। विगत 2 लोकसभा चुनाव में झारखंड की जनता ने भाजपा को भरपूर सीटें दिया लेकिन राज्यहित में केंद्र सरकार ने यहां के लोगों को सिर्फ ठेंगा दिखाने का काम किया है। अमित शाह को अगर वाकई झारखंडियों के हित की चिंता होती तो वह राज्य का बकाया 1 लाख 36 हजार करोड़ देने का काम करते और केंद्र सरकार के पास भेजी हुई सरना धर्म कोड, 27% ओबीसी आरक्षण व 1932 खतियान को लागू करने की पहल करते, लेकिन झारखंड में उन्हें सिर्फ सत्ता पाने की चिंता है। 22 साल में 18 साल झारखंड की सत्ता में रहने वाली भाजपा ने राज्य को गर्त में धकेल दिया है। यहां के खनिज संपदा को लूटकर सरकार बनाने और गिराने के लिए विधायक खरीदने में लगा दिए। 2019 के विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद भी झारखंड में सत्ता पाने के लिए केंद्र सरकार ने पूरी ताकत लगा दिया, लेकिन अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए। हेमंत सरकार की जनप्रिय कार्यशैली को भाजपा शीर्ष नेतृत्व बखूबी समझ रही है और उन्हें मालूम है कि आने वाले चुनाव में उन्हें पुनः मुंह की खानी पड़ेगी।
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